













इस बहस का मुख्य विषय "पवित्र ग्रंथों के प्रकाश में इस्लाम और हिंदू धर्म में ईश्वर की अवधारणा" ( The Concept of God in Islam and Hinduism in the Light of Sacred Scriptures ) था। यह संवाद वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय रहा है क्योंकि इसमें दो अलग-अलग विचारधाराओं के प्रमुख प्रतिनिधि आमने-सामने थे।
सन 2006 में बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड्स में एक ऐसी बहस हुई जिसने भारतीय उपमहाद्वीप में धार्मिक विमर्श की दिशा बदल दी। यह बहस दो अलग-अलग विचारधाराओं के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच थी—एक तरफ थे प्रसिद्ध इस्लामी उपदेशक डॉ. जाकिर नाइक और दूसरी तरफ थे 'आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर। इस ऐतिहासिक चर्चा का विषय था: "ईश्वर की अवधारणा: हिंदू धर्म और इस्लाम के आलोक में" (The Concept of God in Hinduism and Islam)।
सन 2006 में बेंगलुरु के मैदान पर एक ऐसी ऐतिहासिक बहस हुई जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह बहस थी इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. जाकिर नाइक और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर के बीच। इस चर्चा का विषय था: यह बहस आज भी इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजी और देखी जाने वाली बहसों में से एक है। आइए इस ऐतिहासिक संवाद का पूरा विश्लेषण हिंदी में समझते हैं। dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
इस ऐतिहासिक चर्चा का आयोजन 'इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन' (IRF) और 'आर्ट ऑफ लिविंग' (Art of Living) के संयुक्त सहयोग से किया गया था। आयोजन में दोनों पक्षों के हजारों समर्थकों के साथ-साथ विभिन्न धर्मों के विद्वान भी शामिल हुए थे।
क्या आप के संदर्भों को विस्तार से समझना चाहते हैं? is widely considered one of the most high-profile
is widely considered one of the most high-profile debates on comparative religion in India. Held on January 21, 2006 , at the Palace Grounds in Bangalore, the debate was titled
: इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) के संस्थापक, जो तुलनात्मक धर्मशास्त्र (Comparative Religion) और कुरान के उद्धरणों के लिए जाने जाते हैं। at the Palace Grounds in Bangalore
21 जनवरी 2006 को बेंगलुरु में डॉ. ज़ाकिर नाइक श्री श्री रवि शंकर
यह ऐतिहासिक बहस 21 जनवरी, 2006 को बैंगलोर, भारत में आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय (The Concept of God in Islam and Hinduism in the Light of Sacred Scriptures) था।
यह बहस लगभग चार घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें दोनों वक्ताओं के प्रस्तुतीकरण के बाद प्रश्न-उत्तर (Q&A Session) का दौर भी शामिल था।
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